११ सितम्बरनीम करौली बाबा महासमाधि सेवा संकल्प2 दिन शेष · आज ही सेवा-संकल्प लें🙏 सेवा में सहयोग
नीम करौली बाबा · नीब करौरी बाबा · महाराज-जी

नीम करौली बाबा को समझने की हिन्दी मार्गदर्शिका

भक्त उन्हें हनुमान-भक्ति, राम नाम, सहजता, प्रेम और सेवा से जोड़कर याद करते हैं। इस पृष्ठ पर हमने लोककथा और प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य को अलग रखते हुए जीवन, आश्रम, यात्रा और महासमाधि से जुड़ी जानकारी एक स्थान पर रखी है।

कौन थे नीम करौली बाबा?

नीम करौली बाबा को कई स्रोतों में नीब करौरी बाबा और भक्तों में महाराज-जी के नाम से भी जाना जाता है। उनके जीवन का बड़ा भाग उत्तर भारत के आश्रमों, हनुमान मंदिरों, सत्संग और साधारण लोगों के बीच बीता। उनके बारे में अनेक चमत्कार-कथाएँ भी प्रचलित हैं; संकल्प भक्ति उन्हें भक्त-स्मृतियों के रूप में दर्ज करता है, प्रमाणित इतिहास के स्थान पर नहीं।

हनुमान भक्ति और राम नाम

कैंची धाम तथा उनसे जुड़े आश्रमों की परंपरा में हनुमान चालीसा, राम नाम और सेवा की गहरी उपस्थिति दिखाई देती है। कैंची धाम के निर्माण के प्रकाशित विवरण में भी हनुमान चालीसा और राम नाम के जप का उल्लेख मिलता है।

महासमाधि: तारीख को कैसे समझें?

आश्रम की प्रकाशित सामग्री ११ सितम्बर १९७३ को नीम करौली बाबा की महासमाधि तिथि के रूप में स्मरण करती है। वृंदावन आश्रम के विस्तृत इतिहास में यह भी लिखा है कि उन्होंने १० सितम्बर की रात अस्पताल में शरीर छोड़ा और ११ सितम्बर, अनन्त चतुर्दशी को वृंदावन आश्रम में अंतिम संस्कार हुआ। इसलिए संकल्प भक्ति ११ सितम्बर को भक्त-परंपरा के स्थापित स्मरण दिवस के रूप में प्रस्तुत करता है और दोनों विवरणों को पारदर्शिता से दर्ज करता है।