कौन थे नीम करौली बाबा?
नीम करौली बाबा को कई स्रोतों में नीब करौरी बाबा और भक्तों में महाराज-जी के नाम से भी जाना जाता है। उनके जीवन का बड़ा भाग उत्तर भारत के आश्रमों, हनुमान मंदिरों, सत्संग और साधारण लोगों के बीच बीता। उनके बारे में अनेक चमत्कार-कथाएँ भी प्रचलित हैं; संकल्प भक्ति उन्हें भक्त-स्मृतियों के रूप में दर्ज करता है, प्रमाणित इतिहास के स्थान पर नहीं।
हनुमान भक्ति और राम नाम
कैंची धाम तथा उनसे जुड़े आश्रमों की परंपरा में हनुमान चालीसा, राम नाम और सेवा की गहरी उपस्थिति दिखाई देती है। कैंची धाम के निर्माण के प्रकाशित विवरण में भी हनुमान चालीसा और राम नाम के जप का उल्लेख मिलता है।
महासमाधि: तारीख को कैसे समझें?
आश्रम की प्रकाशित सामग्री ११ सितम्बर १९७३ को नीम करौली बाबा की महासमाधि तिथि के रूप में स्मरण करती है। वृंदावन आश्रम के विस्तृत इतिहास में यह भी लिखा है कि उन्होंने १० सितम्बर की रात अस्पताल में शरीर छोड़ा और ११ सितम्बर, अनन्त चतुर्दशी को वृंदावन आश्रम में अंतिम संस्कार हुआ। इसलिए संकल्प भक्ति ११ सितम्बर को भक्त-परंपरा के स्थापित स्मरण दिवस के रूप में प्रस्तुत करता है और दोनों विवरणों को पारदर्शिता से दर्ज करता है।
कैंची धाम
इतिहास, १५ जून का मेला, काठगोदाम से दूरी और यात्रा योजना।
वृंदावन महासमाधि मंदिर
वृंदावन आश्रम, महासमाधि स्थल और यात्रा से पहले जानने योग्य बातें।
स्मरण की मुख्य धाराएँ
राम नाम, हनुमान भक्ति, सत्य, प्रेम और सेवा को भक्त-परंपरा में कैसे याद किया जाता है।
११ सितम्बर सेवा संकल्प
पूजा, दान, प्रसाद और भोजन सेवा में सहभागी होने का सामूहिक अभियान।