नाम-स्मरण
उनसे जुड़े आश्रमों की सामग्री में राम नाम और हनुमान चालीसा की सतत उपस्थिति दिखती है। नाम-स्मरण को यहाँ किसी चमत्कार की तकनीक नहीं, ध्यान, स्मृति और भक्ति की साधना के रूप में पढ़ा गया है।
सेवा
भोजन, प्रसाद, आश्रम-सेवा और आगंतुकों की देखभाल से जुड़ी परंपराएँ यह संकेत देती हैं कि भक्ति का सामाजिक रूप सेवा में दिखाई दे सकता है। संकल्प भक्ति इसी भाव को भोजन सेवा और दान से जोड़ता है।
सत्य और सरलता
भक्त-साहित्य में उनकी शैली को सीधी और व्यक्तिगत बताया गया है। हम इस परंपरा से यह व्यावहारिक सीख लेते हैं कि धार्मिक वेबसाइट को भी स्पष्ट बताना चाहिए कि तथ्य क्या है, कथा क्या है, धन कहाँ उपयोग हो सकता है और कौन-सी बात केवल श्रद्धा का विषय है।