११ सितम्बरनीम करौली बाबा महासमाधि सेवा संकल्प2 दिन शेष · आज ही सेवा-संकल्प लें🙏 सेवा में सहयोग
यात्रा से पहले जानें

भारत की तीर्थयात्राएँ

आस्था के साथ व्यावहारिक तैयारी भी जरूरी है। हर मार्गदर्शिका में कथा/महत्व, सही मौसम, मुख्य स्टेशन या हवाई अड्डा, अंतिम सड़क मार्ग, अनुमानित किराया और यात्रा-सावधानियाँ शामिल हैं।

उत्तराखण्ड

कैंची धाम

कुमाऊँ की पहाड़ियों के बीच नैनीताल–अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित कैंची धाम नीम करौली बाबा से जुड़ा प्रमुख आश्रम और हनुमान मंदिर है। नैनीताल जिला प्रशासन के अनुसार यह भवाली से लगभग 9 किमी, नैनीताल से 17 किमी और काठगोदाम रेल स्टेशन से लगभग 43 किमी दूर है।

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उत्तर प्रदेश

अयोध्या

सरयू तट की अयोध्या रामायण परंपरा का प्रमुख तीर्थ है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और सरयू घाट एक ही यात्रा में देखे जा सकते हैं, पर भीड़ वाले दिनों में समय पर्याप्त रखें।

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उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ

वाराणसी का श्री काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार वाराणसी जंक्शन, बनारस और काशी स्टेशन से मंदिर क्षेत्र तक स्थानीय सड़क संपर्क उपलब्ध है; लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा भी शहर से जुड़ा है।

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उत्तराखण्ड

केदारनाथ

मंदाकिनी घाटी में ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ चारधाम और बारह ज्योतिर्लिंग परंपराओं से जुड़ा है। सड़क यात्रा सोनप्रयाग/गौरीकुंड तक जाती है और आगे पैदल यात्रा, अधिकृत घोड़ा-खच्चर, पालकी या उपलब्ध हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से पहुँचा जाता है।

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उत्तराखण्ड

बद्रीनाथ

अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित बद्रीनाथ हिमालयी चारधाम का प्रमुख वैष्णव तीर्थ है। सड़क मार्ग सीधे बद्रीनाथ नगर तक पहुँचता है, इसलिए केदारनाथ की तुलना में लंबा पैदल मार्ग नहीं है, फिर भी ऊँचाई और मौसम का ध्यान जरूरी है।

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उत्तराखण्ड

गंगोत्री

भागीरथी नदी के तट पर स्थित गंगोत्री मंदिर चारधाम का एक प्रमुख धाम है। सड़क मंदिर नगर तक पहुँचती है; गोमुख की आगे की पदयात्रा अलग अनुमति और पर्वतीय तैयारी माँगती है।

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उत्तराखण्ड

यमुनोत्री

यमुनोत्री चारधाम यात्रा का पारंपरिक पहला धाम माना जाता है। सड़क जानकीचट्टी तक पहुँचती है और वहाँ से मंदिर तक लगभग 3–6 किमी के बीच बताया जाने वाला पर्वतीय पैदल मार्ग है, वर्तमान मार्ग के अनुसार दूरी बदल सकती है।

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जम्मू और कश्मीर

माता वैष्णो देवी

कटरा से भवन तक की वैष्णो देवी यात्रा भारत की सबसे लोकप्रिय पर्वतीय तीर्थयात्राओं में है। यात्रा-पर्ची/पंजीकरण और वर्तमान मार्ग-नियमों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

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उत्तर प्रदेश

मथुरा–वृंदावन

मथुरा और वृंदावन का ब्रज क्षेत्र कृष्ण-भक्ति का जीवित सांस्कृतिक भूगोल है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश, बाँके बिहारी, राधारमण, इस्कॉन, प्रेम मंदिर और यमुना घाट लोकप्रिय पड़ाव हैं।

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ओडिशा

श्रीजगन्नाथ पुरी

पुरी का श्रीजगन्नाथ मंदिर चार प्रमुख धामों की परंपरा में गिना जाता है। रथयात्रा विश्वप्रसिद्ध है; सामान्य दिनों में भी मंदिर, महाप्रसाद और समुद्रतट का अपना विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक अनुभव है।

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आंध्र प्रदेश

तिरुमला तिरुपति

तिरुमला पर्वत पर श्रीवेंकटेश्वर मंदिर भारत के सर्वाधिक दर्शनार्थी मंदिरों में से है। दर्शन टिकट, समयबद्ध प्रवेश और आवास के लिए केवल तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की आधिकारिक व्यवस्था का उपयोग करना चाहिए।

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तमिलनाडु

रामेश्वरम्

पंबन द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग परंपरा और रामायण स्मृति दोनों से जुड़ा है। मंदिर के लंबे गलियारे, तीर्थ-कुण्ड और समुद्र-स्नान की परंपरा प्रसिद्ध है।

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गुजरात

द्वारका

अरब सागर तट की द्वारका चार धाम परंपरा और कृष्ण-भक्ति का प्रमुख केंद्र है। द्वारकाधीश मंदिर के साथ गोमती घाट, बेट द्वारका और नागेश्वर यात्रा में जोड़े जाते हैं।

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गुजरात

सोमनाथ

प्रभास पाटन का सोमनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम के रूप में स्मरण किया जाता है। वर्तमान मंदिर समुद्र के किनारे है और परिसर सुव्यवस्थित तीर्थ-प्रबंधन के लिए जाना जाता है।

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मध्य प्रदेश

उज्जैन महाकालेश्वर

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है। भस्म आरती विशेष आकर्षण है, जिसके लिए वर्तमान आधिकारिक बुकिंग/प्रवेश नियम पहले जाँचना चाहिए।

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मध्य प्रदेश

ओंकारेश्वर

नर्मदा नदी के मंधाता द्वीप पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परंपरा का प्रमुख तीर्थ है। नदी, पुल और परिक्रमा मार्ग इसका विशेष अनुभव बनाते हैं।

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असम

कामाख्या देवी

गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर शक्ति-परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर प्रशासन ने अनधिकृत ऑनलाइन पूजा सेवाओं के प्रति सार्वजनिक चेतावनी भी जारी की है, इसलिए पूजा/बुकिंग के लिए आधिकारिक माध्यम ही उपयोग करें।

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उत्तराखण्ड

हरिद्वार–ऋषिकेश

हरिद्वार और ऋषिकेश उत्तर भारत की अनेक तीर्थयात्राओं के प्रवेश-द्वार हैं। हर की पौड़ी की गंगा आरती, ऋषिकेश के घाट, आश्रम और आगे चारधाम मार्ग इन्हें धार्मिक यात्रा का स्वाभाविक प्रारम्भ बनाते हैं।

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जम्मू और कश्मीर

अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ गुफा की वार्षिक यात्रा सीमित मौसम में आयोजित होती है और प्रशासनिक पंजीकरण, स्वास्थ्य प्रमाणन तथा सुरक्षा नियमों के अधीन रहती है। दो मुख्य मार्ग पहलगाम और बालटाल की ओर से हैं।

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उत्तर प्रदेश

नीम करौली बाबा वृंदावन आश्रम

वृंदावन का नीब करोरी बाबा आश्रम वह स्थान है जहाँ बाबा की महासमाधि स्मृति से जुड़ा मंदिर स्थित है। आश्रम विवरणों के अनुसार 10–11 सितम्बर 1973 की रात उनके अंतिम समय और 11 सितम्बर को आश्रम परिसर में अंतिम संस्कार की परंपरागत स्मृति जुड़ी है।

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किराये केवल सामान्य योजना के लिए अनुमानित दायरे हैं। रेल, उड़ान, टैक्सी, घोड़ा, पालकी और विशेष सेवाओं की कीमत मौसम, श्रेणी, उपलब्धता और सरकारी/मंदिर नियमों से बदलती है। भुगतान से पहले आधिकारिक या अधिकृत स्रोत पर वर्तमान दर अवश्य जाँचें।