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उत्तराखण्ड · माँ यमुना और चारधाम यात्रा का पारंपरिक आरम्भ

यमुनोत्री

यमुनोत्री चारधाम यात्रा का पारंपरिक पहला धाम माना जाता है। सड़क जानकीचट्टी तक पहुँचती है और वहाँ से मंदिर तक लगभग 3–6 किमी के बीच बताया जाने वाला पर्वतीय पैदल मार्ग है, वर्तमान मार्ग के अनुसार दूरी बदल सकती है।

कथा और इतिहास

यमुना को सूर्य की पुत्री और यम की बहन मानने वाली धार्मिक परंपराएँ यमुनोत्री के महत्व को आकार देती हैं। यहाँ हिमालयी स्रोत, गरम जलकुण्ड और नदी-पूजा एक साथ दिखाई देते हैं।

धार्मिक महत्व

चारधाम यात्रा को पश्चिम से पूर्व की ओर यमुनोत्री से आरम्भ करने की परंपरा व्यापक है। यात्रा छोटी दिख सकती है, पर चढ़ाई के कारण शरीर पर दबाव पड़ता है।

यात्रा का बेहतर समय

मई–जून और सितम्बर–अक्टूबर। मानसून में सावधानी; सर्दियों में कपाट बंद।

मुख्य प्रवेश द्वार

मुख्य द्वार: देहरादून/हरिद्वार; सड़क से बड़कोट–हनुमानचट्टी–जानकीचट्टी।

कैसे पहुँचें: चरण-दर-चरण

  1. दिल्ली → देहरादून/हरिद्वार।
  2. देहरादून → बड़कोट → जानकीचट्टी।
  3. जानकीचट्टी → यमुनोत्री: पैदल/अधिकृत घोड़ा/पालकी।

अनुमानित यात्रा खर्च

दिल्ली से देहरादून: लगभग ₹250–₹1,800।
देहरादून से जानकीचट्टी साझा/बस: लगभग ₹600–₹1,500।
घोड़ा/पालकी की अधिकृत दरें स्थानीय प्रशासन से उसी दिन जाँचें।

किराये केवल सामान्य योजना के लिए अनुमानित दायरे हैं। रेल, उड़ान, टैक्सी, घोड़ा, पालकी और विशेष सेवाओं की कीमत मौसम, श्रेणी, उपलब्धता और सरकारी/मंदिर नियमों से बदलती है। भुगतान से पहले आधिकारिक या अधिकृत स्रोत पर वर्तमान दर अवश्य जाँचें।

यात्रा से पहले ध्यान रखें

  • फिसलनरोधी जूते और वर्षा सुरक्षा रखें।
  • अधिकृत सेवा का ही उपयोग करें।
  • कुण्ड और नदी की पवित्रता तथा स्थानीय नियमों का सम्मान करें।

मूल/आधिकारिक संदर्भ देखें →