कथा और इतिहास
यमुना को सूर्य की पुत्री और यम की बहन मानने वाली धार्मिक परंपराएँ यमुनोत्री के महत्व को आकार देती हैं। यहाँ हिमालयी स्रोत, गरम जलकुण्ड और नदी-पूजा एक साथ दिखाई देते हैं।
धार्मिक महत्व
चारधाम यात्रा को पश्चिम से पूर्व की ओर यमुनोत्री से आरम्भ करने की परंपरा व्यापक है। यात्रा छोटी दिख सकती है, पर चढ़ाई के कारण शरीर पर दबाव पड़ता है।
मई–जून और सितम्बर–अक्टूबर। मानसून में सावधानी; सर्दियों में कपाट बंद।
मुख्य द्वार: देहरादून/हरिद्वार; सड़क से बड़कोट–हनुमानचट्टी–जानकीचट्टी।
कैसे पहुँचें: चरण-दर-चरण
- दिल्ली → देहरादून/हरिद्वार।
- देहरादून → बड़कोट → जानकीचट्टी।
- जानकीचट्टी → यमुनोत्री: पैदल/अधिकृत घोड़ा/पालकी।
अनुमानित यात्रा खर्च
किराये केवल सामान्य योजना के लिए अनुमानित दायरे हैं। रेल, उड़ान, टैक्सी, घोड़ा, पालकी और विशेष सेवाओं की कीमत मौसम, श्रेणी, उपलब्धता और सरकारी/मंदिर नियमों से बदलती है। भुगतान से पहले आधिकारिक या अधिकृत स्रोत पर वर्तमान दर अवश्य जाँचें।
यात्रा से पहले ध्यान रखें
- फिसलनरोधी जूते और वर्षा सुरक्षा रखें।
- अधिकृत सेवा का ही उपयोग करें।
- कुण्ड और नदी की पवित्रता तथा स्थानीय नियमों का सम्मान करें।