पारंपरिक अवधि: 12,96,000 मानव वर्ष · युग अनुपात: 3 · धर्म-रूपक: धर्म के तीन पाद
त्रेता युग भारतीय स्मृति में विशेष रूप से रामायण और श्रीराम की मर्यादा से जुड़ा है। राजधर्म, परिवार, वचन, वनवास, सेवा, मैत्री और युद्ध जैसे प्रश्न इस युग की कथाओं में बार-बार सामने आते हैं।
पुराणिक गणना में इसकी अवधि 12,96,000 मानव वर्ष कही गई है। चार युगों के 4:3:2:1 अनुपात में यह दूसरा चरण है।
त्रेता को पढ़ते समय केवल आदर्श पात्रों की सूची बनाने के बजाय यह देखना उपयोगी है कि कठिन निर्णयों के बीच धर्म को कैसे समझा और निभाया जाता है।
इन अवधियों को धार्मिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान के रूप में पढ़ें, आधुनिक वैज्ञानिक काल-गणना के रूप में नहीं।