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कलि युग

वर्तमान युग और साधना की सरलता का विचार

पारंपरिक अवधि: 4,32,000 मानव वर्ष · युग अनुपात: 1 · धर्म-रूपक: धर्म का एक पाद

पुराणिक परंपरा में कलि युग चार युगों का चौथा चरण है। इसे नैतिक चुनौती, अस्थिरता और भौतिक आकर्षण से भरे समय के रूप में वर्णित किया जाता है।

इसकी पारंपरिक अवधि 4,32,000 मानव वर्ष कही जाती है। अनेक भक्ति परंपराएँ कठिन समय में नाम-स्मरण, कीर्तन, सेवा और सरल भक्ति को विशेष महत्व देती हैं।

कलि युग की धारणा का उपयोग निराशा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि यह पूछने के लिए किया जा सकता है कि कठिन समय में छोटे, नियमित और ईमानदार अभ्यास कैसे बनाए जाएँ।

इन अवधियों को धार्मिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान के रूप में पढ़ें, आधुनिक वैज्ञानिक काल-गणना के रूप में नहीं।