पारंपरिक अवधि: 8,64,000 मानव वर्ष · युग अनुपात: 2 · धर्म-रूपक: धर्म के दो पाद
द्वापर युग महाभारत, श्रीकृष्ण और भगवद्गीता से गहराई से जुड़ा है। यहाँ धर्म अधिक जटिल दिखाई देता है; सही निर्णय हमेशा सरल नियम से तय नहीं होता।
पुराणिक गणना में इसकी अवधि 8,64,000 मानव वर्ष कही जाती है। रूपक में धर्म के दो पाद शेष माने जाते हैं।
महाभारत का संसार हमें यह दिखाता है कि सत्ता, परिवार, मित्रता, युद्ध और व्यक्तिगत संदेह के बीच नैतिक निर्णय कितने कठिन हो सकते हैं।
इन अवधियों को धार्मिक ब्रह्माण्ड-विज्ञान के रूप में पढ़ें, आधुनिक वैज्ञानिक काल-गणना के रूप में नहीं।