निर्णय के लिए समय नहीं था
लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल थे। हनुमान को औषधि लाने भेजा गया। यह ऐसा कार्य था जहाँ देरी स्वयं खतरा थी।
जब पहचान कठिन हो गई
लोकप्रिय कथा में हनुमान उचित औषधि पहचान न पाने पर पूरा पर्वत उठा लाते हैं। प्रसंग का भाव यह है कि जब उद्देश्य जीवन-रक्षा हो, तो अहंकार से अधिक परिणाम महत्वपूर्ण है।

समर्पण का प्रतीक
यह कथा भक्ति में हनुमान को उस सेवा का प्रतीक बनाती है जो कठिनाई देखकर पीछे नहीं हटती।
आधार: रामायण परंपरा, युद्धकाण्ड के लोकप्रिय प्रसंग। यह सरल हिन्दी पुनर्कथन है; व्याख्यात्मक वाक्य शास्त्र के शब्दशः उद्धरण नहीं हैं।