एक व्यक्ति नहीं, पूरी सेना
हनुमान समुद्र पार कर चुके थे, लेकिन युद्ध के लिए पूरी वानर सेना को लंका पहुँचना था। समाधान अब व्यक्तिगत वीरता नहीं, सामूहिक प्रयास था।
नल और निर्माण
परंपरा में नल के नेतृत्व में सेतु-निर्माण का वर्णन मिलता है। अनगिनत हाथ, अलग-अलग भूमिकाएँ और एक साझा उद्देश्य इस प्रसंग को सेवा के सामूहिक रूप में बदल देते हैं।

संगठन का मूल्य
बड़े कार्य केवल सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से नहीं होते। दिशा, भूमिका, विश्वास और निरंतर छोटे योगदान मिलकर असंभव दिखने वाले कार्य को संभव बनाते हैं।
आधार: वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड। यह सरल हिन्दी पुनर्कथन है; व्याख्यात्मक वाक्य शास्त्र के शब्दशः उद्धरण नहीं हैं।