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समुद्र के उस पार: हनुमान की महान छलाँग

जाम्बवान का स्मरण, असंभव-सा लक्ष्य और वह यात्रा जिसमें शक्ति से अधिक एकाग्रता की परीक्षा हुई।

जब शक्ति याद दिलानी पड़ी

समुद्र सामने था। वानर दल सीता का पता पा चुका था, पर अब प्रश्न था कि वहाँ पहुँचे कौन और लौटे कौन। जाम्बवान ने हनुमान को कोई नई शक्ति नहीं दी; उन्होंने वह याद दिलाया जो हनुमान स्वयं भूल बैठे थे।

मार्ग सीधा नहीं था

मैनाक ने विश्राम दिया, सुरसा ने परीक्षा ली और सिंहिका ने मार्ग रोका। हर परिस्थिति का उत्तर अलग था: कहीं सम्मान, कहीं बुद्धि, कहीं निर्णायक बल।

रामायण का ऐतिहासिक चित्र
मेट्रोपॉलिटन कला संग्रहालय · सार्वजनिक अधिकार · मूल संग्रहालय स्रोत

लंका पहुँचकर आकार बदलना

समुद्र पार करने के बाद हनुमान ने अपने आकार को छोटा किया। अभी तक विशाल शक्ति चाहिए थी, अब संयम, धैर्य और गोपनीयता। सही समय पर बड़ा होना शक्ति है; सही समय पर छोटा हो जाना भी।

आज की सीख

कभी-कभी दूरी सच में बड़ी होती है, पर मन उसे और बड़ा कर देता है। स्पष्ट उद्देश्य शक्ति, बुद्धि और धैर्य को एक दिशा देता है।

आधार: वाल्मीकि रामायण, सुन्दरकाण्ड। यह सरल हिन्दी पुनर्कथन है; व्याख्यात्मक वाक्य शास्त्र के शब्दशः उद्धरण नहीं हैं।