यह व्रत या पर्व क्या है?
यमुना जी के प्राकट्य/जयंती से जुड़ा ब्रज क्षेत्र का पर्व।
शुरुआत और परंपरा
ब्रज संस्कृति में यमुना कृष्ण-लीला और पवित्र भूगोल का केंद्र हैं।
कथा
यमुना-पूजन, घाट आरती और जल के प्रति श्रद्धा के प्रसंग प्रमुख हैं।
भाव और महत्व
नदी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और यमुना मैया का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास परंपरा-आधारित।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ यमुनायै नमः।
क्षेत्रीय अंतर
ब्रज क्षेत्र में इसका विशेष महत्व।