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पर्व · पूर्व / उत्तर भारत

विश्वकर्मा पूजा

शिल्प, औजार, मशीन और कार्यस्थल के सम्मान का पर्व।

आगामी तिथियाँ

गुरुवार · 17 सितंबर 2026कन्या संक्रांति

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

शिल्प, औजार, मशीन और कार्यस्थल के सम्मान का पर्व।

शुरुआत और परंपरा

विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पी मानने की पुराणिक परंपरा से जुड़ा।

कथा

देव-नगर, वास्तु और दिव्य आयुधों के निर्माण के प्रसंग विश्वकर्मा से जुड़े हैं।

भाव और महत्व

काम के साधनों, कौशल और सुरक्षित श्रम का सम्मान।

घर में सरल विधि

कार्यस्थल साफ करें, औजारों की सुरक्षित देखभाल और कौशल के प्रति कृतज्ञता।

व्रत, भोजन और पारण

उपवास आवश्यक नहीं।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

क्षेत्रीय अंतर

पूर्वी भारत और औद्योगिक समुदायों में विशेष।

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