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व्रत · सम्पूर्ण भारत

विनायक चतुर्थी

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मासिक विनायक चतुर्थी के रूप में गणेश-उपासना की जाती है। भाद्रपद की चतुर्थी वार्षिक गणेशोत्सव का प्रमुख दिन है।

आगामी तिथियाँ

सोमवार · 14 सितंबर 2026शुक्ल पक्ष चतुर्थी · मध्याह्न पूजा 11:02-13:31 · दिल्ली
बुधवार · 14 अक्टूबर 2026शुक्ल पक्ष चतुर्थी · मध्याह्न पूजा 10:58-13:16 · दिल्ली
शुक्रवार · 13 नवंबर 2026शुक्ल पक्ष चतुर्थी · मध्याह्न पूजा 11:01-13:10 · दिल्ली
रविवार · 13 दिसंबर 2026शुक्ल पक्ष चतुर्थी · मध्याह्न पूजा 11:13-13:17 · दिल्ली

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मासिक विनायक चतुर्थी के रूप में गणेश-उपासना की जाती है। भाद्रपद की चतुर्थी वार्षिक गणेशोत्सव का प्रमुख दिन है।

शुरुआत और परंपरा

गणेश को आरंभ, बुद्धि और विघ्न-निवारण के देवता के रूप में स्मरण करने की परंपरा से यह मासिक साधना जुड़ी है।

कथा

कथा-परंपराएँ गणेश-जन्म, शिव-पार्वती परिवार और बुद्धि-विनय के प्रसंगों को केंद्र में रखती हैं।

भाव और महत्व

नए आरंभ से पहले स्पष्टता, विनम्रता और व्यवस्थित प्रयास।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और श्रीगणेश का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

उपवास वैकल्पिक/परंपरा-आधारित। मध्याह्न पूजा समय स्थानीय पंचांग से देखें।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ गं गणपतये नमः।

क्षेत्रीय अंतर

गणेश चतुर्थी की तिथि-परंपरा महाराष्ट्र में विशेष रूप से विस्तृत है।

तिथि-स्रोत देखें →