यह व्रत या पर्व क्या है?
सावित्री-सत्यवान की कथा और वट-वृक्ष से जुड़ा गृहस्थ व्रत।
शुरुआत और परंपरा
उत्तर भारत में अमावस्या, महाराष्ट्र/कुछ पश्चिमी परंपराओं में वट पूर्णिमा पर पालन मिलता है।
कथा
महाभारत में सावित्री की बुद्धि, निष्ठा और यम से संवाद की कथा प्रसिद्ध है।
भाव और महत्व
धैर्य, बुद्धि, संबंधों में प्रतिबद्धता और जीवन का सम्मान।
घर में सरल विधि
सावित्री-सत्यवान कथा, वट वृक्ष की प्रतीकात्मक पूजा और परिवार की मंगल-कामना।
व्रत, भोजन और पारण
कठोर उपवास स्वास्थ्य अनुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
सावित्री-सत्यवान का स्मरण।
क्षेत्रीय अंतर
तिथि उत्तर/पश्चिम परंपरा में अलग हो सकती है।