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पर्व · North/पूर्व भारत

वसंत पंचमी

वसंत और सरस्वती-पूजा से जुड़ा पर्व।

आगामी तिथियाँ

गुरुवार · 11 फरवरी 2027माघ शुक्ल पंचमी

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

वसंत और सरस्वती-पूजा से जुड़ा पर्व।

शुरुआत और परंपरा

ऋतु परिवर्तन और विद्या/कला की देवी सरस्वती की उपासना के साथ इसका सांस्कृतिक विस्तार हुआ।

कथा

सरस्वती को वाणी, ज्ञान और कला का स्रोत मानते हुए विद्यार्थी पुस्तकों/वाद्यों का सम्मान करते हैं।

भाव और महत्व

सीखने की विनम्रता और सृजनात्मकता।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

आमतौर पर कठोर उपवास आवश्यक नहीं।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।

क्षेत्रीय अंतर

बंगाल/पूर्व भारत में सरस्वती पूजा का सार्वजनिक रूप विशेष लोकप्रिय है।

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