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व्रत · दक्षिण भारत

स्कंद षष्ठी

स्कंद षष्ठी विशेषकर तमिल और दक्षिण भारतीय परंपराओं में भगवान मुरुगन/कार्तिकेय की उपासना से जुड़ी है।

आगामी तिथियाँ

बुधवार · 16 सितंबर 2026शुक्ल षष्ठी
शुक्रवार · 16 अक्टूबर 2026शुक्ल षष्ठी
रविवार · 15 नवंबर 2026शुक्ल षष्ठी
मंगलवार · 15 दिसंबर 2026शुक्ल षष्ठी

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

स्कंद षष्ठी विशेषकर तमिल और दक्षिण भारतीय परंपराओं में भगवान मुरुगन/कार्तिकेय की उपासना से जुड़ी है।

शुरुआत और परंपरा

स्कंद/मुरुगन की देवसेना, ज्ञान और असुर-विजय की कथाएँ दक्षिण भारतीय भक्ति-साहित्य और मंदिर परंपरा में महत्वपूर्ण हैं।

कथा

सूरपद्म पर विजय का प्रसंग विशेष रूप से स्कंद षष्ठी उत्सव से जुड़ा है।

भाव और महत्व

साहस, अनुशासन और अहंकार पर विजय का भाव।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और भगवान स्कंद/मुरुगन का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार उपवास।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ सरवणभवाय नमः।

क्षेत्रीय अंतर

तमिलनाडु और दक्षिण भारत में इसकी विस्तृत मंदिर-विधियाँ हैं।

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