यह व्रत या पर्व क्या है?
माता सीता के प्राकट्य/जन्म की स्मृति।
शुरुआत और परंपरा
रामायण परंपरा में मिथिला के राजा जनक को खेत जोतते समय सीता मिलने का प्रसिद्ध प्रसंग है।
कथा
धरती से प्रकट सीता की कथा धैर्य, करुणा और गरिमा के साथ पढ़ी जाती है।
भाव और महत्व
गरिमा, धैर्य और पृथ्वी के प्रति सम्मान।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और सीता-राम का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास परंपरा-आधारित।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
सीताराम सीताराम।
क्षेत्रीय अंतर
मिथिला/उत्तर भारत में विशेष।