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व्रत · उत्तर / पश्चिम भारत

शीतला अष्टमी / बसोड़ा

शीतला माता, ऋतु-परिवर्तन और पारंपरिक घरेलू स्वास्थ्य-संस्कृति से जुड़ा व्रत।

यह व्रत या पर्व क्या है?

शीतला माता, ऋतु-परिवर्तन और पारंपरिक घरेलू स्वास्थ्य-संस्कृति से जुड़ा व्रत।

शुरुआत और परंपरा

राजस्थान, गुजरात, UP और अन्य क्षेत्रों में बसोड़ा/बासोड़ा के रूप में अलग तिथियों पर भी मनाया जाता है।

कथा

लोककथाएँ शीतला माता, स्वच्छता और परिवार की रक्षा के भाव को केंद्र में रखती हैं।

भाव और महत्व

स्वच्छता, भोजन-सुरक्षा और परिवार की देखभाल।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

स्थानीय परंपरा में पूर्व-पका भोजन प्रचलित हो सकता है; आधुनिक food-safety का ध्यान रखें।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

शीतला माता का स्थानीय नाम-स्मरण।

क्षेत्रीय अंतर

तिथि और भोजन-विधि क्षेत्रानुसार बहुत बदलती है।

तिथि-स्रोत देखें →