आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
शरद ऋतु की उजली पूर्णिमा, कृष्ण-भक्ति और लक्ष्मी परंपरा से जुड़ी।
शुरुआत और परंपरा
ब्रज में रास परंपरा, पूर्व भारत में कोजागरी लक्ष्मी पूजा और अलग क्षेत्रीय रूप मिलते हैं।
कथा
कृष्ण-रास और लक्ष्मी के जागरण की अलग-अलग लोकप्रिय कथाएँ हैं।
भाव और महत्व
सौंदर्य, कृतज्ञता और ऋतु का उत्सव।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास क्षेत्रानुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः / कृष्ण नाम।
क्षेत्रीय अंतर
खीर को चाँदनी में रखने की लोक परंपरा है; food-safety का ध्यान रखें।