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व्रत · उत्तर / पश्चिम भारत

ऋषि पंचमी

सप्तऋषियों के स्मरण और पारंपरिक शुद्धि-व्रत का दिन।

आगामी तिथियाँ

मंगलवार · 15 सितंबर 2026भाद्रपद शुक्ल पंचमी

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

सप्तऋषियों के स्मरण और पारंपरिक शुद्धि-व्रत का दिन।

शुरुआत और परंपरा

गृहस्थ व्रत-साहित्य में ऋषि-ऋण और शुद्धि के विचार से जुड़ा है।

कथा

लोकप्रिय कथा में अनजाने नियम-भंग और प्रायश्चित्त का प्रसंग मिलता है; आधुनिक पाठ में इसे अपराधबोध की जगह स्वच्छता और आत्मचिंतन के संदर्भ में समझना बेहतर है।

भाव और महत्व

ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता और आत्मनिरीक्षण।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और सप्तऋषि का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

कठोर नियम परंपरा-आधारित और स्वास्थ्य अनुसार।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ ऋषिभ्यो नमः।

क्षेत्रीय अंतर

विशेषकर महाराष्ट्र/राजस्थान/उत्तर भारत की कुछ परंपराओं में।

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