यह व्रत या पर्व क्या है?
सूर्य-उपासना और ऋतु-चक्र से जुड़ा दिन।
शुरुआत और परंपरा
सूर्य के सात अश्वों वाले रथ का प्रतीक समय, प्रकाश और ऊर्जा के चक्र से जोड़ा जाता है।
कथा
लोकप्रिय पूजा में सूर्य को अर्घ्य, स्नान और आदित्य-हृदय/सूर्य-नाम स्मरण किया जाता है।
भाव और महत्व
प्रकाश, स्वास्थ्य-जागरूकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और सूर्यदेव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास क्षेत्रानुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ सूर्याय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिल परंपराओं में विशेष रूप से प्रसिद्ध।