आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
रक्षा-संकल्प और भाई-बहन संबंध का पर्व।
शुरुआत और परंपरा
रक्षा-सूत्र की परंपरा कई ऐतिहासिक/पुराणिक कथाओं से जोड़ी जाती है; आधुनिक पारिवारिक रूप व्यापक है।
कथा
कृष्ण-द्रौपदी, इंद्र-इंद्राणी आदि अनेक लोकप्रिय कथाएँ सुनाई जाती हैं, पर एक ही कथा सर्वमान्य स्रोत नहीं है।
भाव और महत्व
परस्पर सम्मान, जिम्मेदारी और सुरक्षा का वचन।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास आवश्यक नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
परिवार की मंगल-प्रार्थना।
क्षेत्रीय अंतर
रक्षा-सूत्र केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं; अलग समुदायों में व्यापक संबंधों में भी बाँधा जाता है।