आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
प्रदोष व्रत शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की त्रयोदशी को शिव-उपासना से जुड़ा है। इसका पूजा-समय स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है।
शुरुआत और परंपरा
प्रदोष की कथाएँ शिव-भक्ति, संकट से निवृत्ति और विनम्रता के भाव को केंद्र में रखती हैं। सप्ताह के दिन के अनुसार सोम, भौम, शनि आदि प्रदोष नाम प्रचलित हैं।
कथा
लोकप्रिय कथा-परंपरा में देवताओं के संकट, शिव की शरण और प्रदोष-काल की आराधना के प्रसंग मिलते हैं। मुख्य शिक्षा अहंकार कम करना, संयम और शिव-स्मरण है।
भाव और महत्व
संध्या का सीमित, ध्यानपूर्ण पूजा-काल और नियमितता।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
फलाहार/उपवास पारिवारिक परंपरा से। पूजा का विशेष समय सूर्यास्त के आसपास प्रदोष काल में होता है।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमः शिवाय।
क्षेत्रीय अंतर
प्रदोष का सटीक समय शहर के सूर्यास्त से बदलता है। नीचे समय दिल्ली/NCR के लिए है।