आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
पितरों के स्मरण, श्राद्ध और दान का पक्ष।
शुरुआत और परंपरा
भारतीय गृहस्थ परंपराओं में पूर्वज-स्मरण और पारिवारिक वंश-ऋण की अवधारणा से जुड़ा है।
कथा
कर्ण की लोकप्रिय कथा अक्सर पितृ पक्ष से जोड़ी जाती है, जिसमें दान और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य का भाव आता है।
भाव और महत्व
कृतज्ञता, परिवार की स्मृति और दान।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास सार्वभौमिक नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
क्षेत्रीय अंतर
श्राद्ध की तिथि मृत्यु-तिथि और परिवार की परंपरा पर निर्भर करती है।