यह व्रत या पर्व क्या है?
एकादशी वैष्णव परंपरा का नियमित उपवास और स्मरण-दिवस है। वर्ष में सामान्यतः 24 एकादशियाँ आती हैं; अधिक मास या परंपरा के अनुसार संख्या/नाम में अतिरिक्त भेद हो सकते हैं।
शुरुआत और परंपरा
एकादशी की परंपरा पुराणों और वैष्णव व्रत-साहित्य में अनेक कथाओं के साथ विकसित हुई। अलग एकादशी के साथ अलग कथा और फलश्रुति जुड़ी मिलती है।
कथा
भीम से जुड़ी प्रसिद्ध कथा में सभी एकादशी व्रत न रख पाने की कठिनाई और एक निर्जल व्रत के संकल्प का प्रसंग आता है। स्वास्थ्य कारणों से निर्जल व्रत को अनिवार्य न समझें।
भाव और महत्व
इंद्रिय-संयम, नियमित उपासना, दान, सरल भोजन और मन को विष्णु-स्मरण में लगाने की परंपरा।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
कई परिवार दशमी से सात्त्विक आहार रखते हैं और एकादशी पर अन्न त्यागते हैं। निर्जल/कठोर व्रत सबके लिए उचित नहीं; स्वास्थ्य की जरूरत प्राथमिक है। पारण द्वादशी में परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
क्षेत्रीय अंतर
स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में कभी-कभी उपवास-दिन अलग हो सकता है। दिल्ली/NCR के लिए नीचे दिए दिन स्थानीय पंचांग-स्रोत पर आधारित हैं।