यह व्रत या पर्व क्या है?
भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की स्मृति।
शुरुआत और परंपरा
भागवत/पुराण परंपरा में प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के अंत का प्रसंग।
कथा
प्रह्लाद की अडिग भक्ति और सत्ता के अहंकार के सामने संरक्षण की कथा इसका केंद्र है।
भाव और महत्व
अन्याय के सामने साहस और विश्वास।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और श्रीविष्णु/नारायण का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
वैष्णव परंपरा में व्रत और संध्या पूजा।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नृसिंहाय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
वैष्णव संप्रदायों में विधि/पारण भिन्न।