यह व्रत या पर्व क्या है?
नाग-पूजा, प्रकृति और वर्षा-ऋतु से जुड़ा पर्व।
शुरुआत और परंपरा
सर्पों को पवित्र/रक्षक रूप में देखने की अनेक लोक और पुराण परंपराएँ हैं।
कथा
कृष्ण-कालिय, मनसा, नागवंश आदि कई कथाएँ क्षेत्रानुसार जुड़ती हैं।
भाव और महत्व
जीव-जगत और प्रकृति के प्रति सम्मान।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और नाग-देवता/इष्ट का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
क्षेत्रानुसार उपवास।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नागदेवताभ्यो नमः।
क्षेत्रीय अंतर
जीवित साँपों को पकड़ना, दूध पिलाना या परेशान करना सुरक्षित/उचित नहीं; प्रतीकात्मक पूजा करें।