यह व्रत या पर्व क्या है?
भारतीय सौर कैलेंडरों में नववर्ष/नए सौर मास का महत्वपूर्ण संक्रमण।
शुरुआत और परंपरा
तमिल पुथांडु, विषु, पोहेला बोइशाख, बैसाखी के आसपास अलग क्षेत्रीय नववर्ष परंपराएँ आती हैं।
कथा
एक ही कथा नहीं; यह ज्योतिषीय सौर संक्रमण और कृषि/ऋतु चक्र से जुड़ा सांस्कृतिक समूह है।
भाव और महत्व
क्षेत्रीय पहचान और नए वर्ष की कृतज्ञ शुरुआत।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और सूर्यदेव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास आवश्यक नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ सूर्याय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
राज्य के अनुसार नाम और दिन-गणना अलग।