आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
हर मास की कृष्ण चतुर्दशी शिवरात्रि-साधना का अवसर मानी जाती है। फाल्गुन की शिवरात्रि महाशिवरात्रि के रूप में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
शुरुआत और परंपरा
शिवरात्रि परंपरा तप, मौन, जागरण और शिव-शक्ति के ध्यान से जुड़ी है। अमान्त/पूर्णिमान्त मास-नाम में अंतर हो सकता है।
कथा
शिव-पार्वती, लिंगोद्भव और विविध पुराण-परंपराओं की कथाएँ प्रचलित हैं। सभी क्षेत्रों में एक ही कथा या एक ही विधि अनिवार्य नहीं है।
भाव और महत्व
रात्रि में सजगता, आत्मनिरीक्षण, सरलता और शिव-स्मरण।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
कुछ साधक दिनभर उपवास और रात में जागरण करते हैं। कठोर उपवास स्वास्थ्य के अनुसार ही रखें।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमः शिवाय। महामृत्युंजय मंत्र का जप भी परंपरा में प्रचलित है।
क्षेत्रीय अंतर
निशीथ काल शहर के अनुसार बदलता है। नीचे दिल्ली/NCR timings हैं।