यह व्रत या पर्व क्या है?
मंगला गौरी व्रत श्रावण के मंगलवार को देवी गौरी की पूजा से जुड़ा है। विवाहित स्त्रियों में इसकी पारिवारिक परंपराएँ विशेष रूप से मिलती हैं।
शुरुआत और परंपरा
गौरी-पार्वती को सौभाग्य, दाम्पत्य और पारिवारिक मंगल से जोड़ने वाली परंपराओं का यह हिस्सा है।
कथा
लोक कथाओं में विश्वास, गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारी और देवी-कृपा के प्रसंग आते हैं।
भाव और महत्व
परिवार के मंगल के साथ आत्मसम्मान, करुणा और संबंधों में जिम्मेदारी।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
व्रत की कठोरता घर की परंपरा से तय होती है।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ गौर्यै नमः।
क्षेत्रीय अंतर
उत्तर भारतn और West/South lunar month convention के कारण तारीखें अलग हो सकती हैं।