आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
सूर्य-उत्तरायण और ऋतु-परिवर्तन से जुड़ा सौर पर्व।
शुरुआत और परंपरा
सौर गणना पर आधारित होने के कारण यह चंद्र-पर्वों की तुलना में जनवरी मध्य के आसपास स्थिर रहता है।
कथा
क्षेत्रों में गंगा-स्नान, तिल-गुड़, दान, पतंग, पोंगल और माघ बिहू जैसी विविध परंपराएँ मिलती हैं।
भाव और महत्व
कृतज्ञता, दान और प्रकृति/कृषि चक्र का सम्मान।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
विशेष उपवास अनिवार्य नहीं; क्षेत्रानुसार भोजन/दान।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ सूर्याय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
गुजरात में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू जैसे रूप।