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पर्व · सम्पूर्ण भारत

मकर संक्रांति

सूर्य-उत्तरायण और ऋतु-परिवर्तन से जुड़ा सौर पर्व।

आगामी तिथियाँ

शुक्रवार · 15 जनवरी 2027सौर मकर प्रवेश

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

सूर्य-उत्तरायण और ऋतु-परिवर्तन से जुड़ा सौर पर्व।

शुरुआत और परंपरा

सौर गणना पर आधारित होने के कारण यह चंद्र-पर्वों की तुलना में जनवरी मध्य के आसपास स्थिर रहता है।

कथा

क्षेत्रों में गंगा-स्नान, तिल-गुड़, दान, पतंग, पोंगल और माघ बिहू जैसी विविध परंपराएँ मिलती हैं।

भाव और महत्व

कृतज्ञता, दान और प्रकृति/कृषि चक्र का सम्मान।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और सूर्यदेव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

विशेष उपवास अनिवार्य नहीं; क्षेत्रानुसार भोजन/दान।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ सूर्याय नमः।

क्षेत्रीय अंतर

गुजरात में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू जैसे रूप।

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