आगामी तिथियाँ
शनिवार · 6 मार्च 2027फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
शिव-उपासना की प्रमुख रात्रि।
शुरुआत और परंपरा
शिवरात्रि की अनेक पुराणिक व्याख्याएँ हैं: शिव-पार्वती, लिंगोद्भव और रात्रि-जागरण की परंपराएँ प्रमुख हैं।
कथा
लोकप्रिय कथाओं में निष्काम भक्ति, जागरूकता और शिव के अनंत रूप का स्मरण मिलता है।
भाव और महत्व
अहंकार कम करना, मौन, ध्यान और आत्मनिरीक्षण।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और भगवान शिव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
कई साधक उपवास और रात्रि-जागरण करते हैं; स्वास्थ्य अनुसार रखें।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमः शिवाय।
क्षेत्रीय अंतर
पूजा-प्रहर और निशीथ समय स्थानानुसार बदलते हैं।