आगामी तिथियाँ
मंगलवार · 24 नवंबर 2026कार्तिक पूर्णिमा
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
दीपदान, स्नान, देव दीपावली और अनेक क्षेत्रीय मेलों का दिन।
शुरुआत और परंपरा
कार्तिक मास को स्नान-दान और दीपदान के लिए विशेष मानने की व्यापक परंपरा है।
कथा
त्रिपुरासुर-वध/त्रिपुरारी पूर्णिमा तथा विष्णु-भक्ति की कथाएँ विभिन्न क्षेत्रों में जुड़ती हैं।
भाव और महत्व
प्रकाश, दान और पवित्रता का भाव।
घर में सरल विधि
स्नान, दीपदान, पूजा और दान; नदी-घाट पर सुरक्षा रखें।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास परंपरा-आधारित।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमो नारायणाय / ॐ नमः शिवाय।
क्षेत्रीय अंतर
वाराणसी की देव दीपावली विशेष प्रसिद्ध है।