आगामी तिथियाँ
मंगलवार · 1 दिसंबर 2026मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
शिव के भैरव रूप की उपासना का दिन।
शुरुआत और परंपरा
शैव परंपरा में भैरव समय, सीमा, संरक्षण और तीर्थ-रक्षा से जुड़े रूप हैं।
कथा
कालभैरव की काशी से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं।
भाव और महत्व
समय का सम्मान, निर्भयता और जिम्मेदार आचरण।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और भगवान शिव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
परंपरा अनुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ कालभैरवाय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
काशी और शैव मंदिरों में विशेष।