यह व्रत या पर्व क्या है?
मानसून और गौरी-शिव से जुड़ा तीज पर्व।
शुरुआत और परंपरा
UP, MP, Bihar और Rajasthan के कुछ भागों में कजरी लोकगीतों के साथ मनाया जाता है।
कथा
गौरी-शिव और वैवाहिक मंगल की लोककथाएँ।
भाव और महत्व
लोकसंगीत, संबंध और ऋतु-संवेदना।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
परंपरा अनुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
गौरी-शंकर स्मरण।
क्षेत्रीय अंतर
क्षेत्रीय रूप व्यापक रूप से बदलते हैं।