आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
वसंत, रंग और सामाजिक उत्सव का पर्व।
शुरुआत और परंपरा
होलिका-दहन और रंगोत्सव के दो प्रमुख आयाम हैं। ब्रज, राजस्थान, गुजरात और अन्य क्षेत्रों में रूप अलग हैं।
कथा
प्रह्लाद-होलिका की लोकप्रिय कथा अहंकार और अत्याचार के सामने भक्ति/सत्य के टिके रहने का प्रतीक मानी जाती है।
भाव और महत्व
मनमुटाव कम करना, समुदाय और आनंद।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
कठोर उपवास सामान्यतः केंद्र नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
क्षेत्रीय अंतर
ब्रज की लठमार/फूलों की होली, बंगाल की डोल यात्रा आदि अलग रूप हैं।