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व्रत · उत्तर / पश्चिम भारत

हरतालिका तीज

पार्वती-शिव से जुड़ा व्रत, विशेषकर उत्तर और पश्चिम भारत में।

आगामी तिथियाँ

सोमवार · 14 सितंबर 2026भाद्रपद शुक्ल तृतीया

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

पार्वती-शिव से जुड़ा व्रत, विशेषकर उत्तर और पश्चिम भारत में।

शुरुआत और परंपरा

हरतालिका नाम उस कथा से जुड़ता है जिसमें पार्वती की सखी उन्हें वन में ले जाती है ताकि वे अपनी इच्छा से शिव को पति रूप में पाने के लिए तप कर सकें।

कथा

पार्वती के संकल्प, तप और स्वतंत्र निर्णय की लोकप्रिय कथा इसका केंद्र है।

भाव और महत्व

संकल्प, आत्मसम्मान और संबंधों में परस्पर सम्मान।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

कई परंपराओं में निर्जला व्रत प्रचलित है, पर स्वास्थ्य प्राथमिक है; निर्जल व्रत आवश्यक नहीं मानें।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ पार्वत्यै नमः।

क्षेत्रीय अंतर

नेपाल/राजस्थान/UP/MP आदि में गीत, झूले और विधियाँ अलग।

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