आगामी तिथियाँ
बुधवार · 4 अगस्त 2027श्रावण शुक्ल तृतीया
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
मानसून, गौरी-शिव और स्त्री लोकगीतों से जुड़ा उत्सव।
शुरुआत और परंपरा
राजस्थान, हरियाणा, UP आदि में झूले, मेहंदी, गीत और मायके-ससुराल की सामाजिक परंपराएँ मिलती हैं।
कथा
गौरी-शिव मिलन की कथा लोकप्रिय है।
भाव और महत्व
प्रकृति, संबंध और स्त्री लोकसंस्कृति का उत्सव।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास परंपरा-आधारित।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
गौरी-शंकर स्मरण।
क्षेत्रीय अंतर
क्षेत्रीय नाम और विधि अलग।