यह व्रत या पर्व क्या है?
हनुमान जी के जन्म और राम-भक्ति का उत्सव।
शुरुआत और परंपरा
हनुमान जन्म की तिथि और कथा क्षेत्रानुसार अलग परंपराओं में मिलती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा व्यापक है।
कथा
बाल हनुमान, सूर्य से विद्या, राम से भेंट और निष्काम सेवा के प्रसंग पढ़े जाते हैं।
भाव और महत्व
सेवा, साहस, बुद्धि और भक्ति।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और श्रीहनुमान का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास वैकल्पिक/परंपरागत।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ हनुमते नमः। श्री राम जय राम जय जय राम।
क्षेत्रीय अंतर
दक्षिण और पश्चिम भारत की कुछ परंपराओं में हनुमान जयंती दूसरी तिथि पर होती है।