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पर्व · सम्पूर्ण भारत

गुरु पूर्णिमा

गुरु, शिक्षक और ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता का दिन।

आगामी तिथियाँ

रविवार · 18 जुलाई 2027आषाढ़ पूर्णिमा

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

गुरु, शिक्षक और ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता का दिन।

शुरुआत और परंपरा

व्यास पूजा से इसका गहरा संबंध है, इसलिए व्यास पूर्णिमा नाम भी मिलता है।

कथा

महर्षि व्यास और ज्ञान-परंपरा के स्मरण के साथ जीवित गुरु/शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।

भाव और महत्व

कृतज्ञता, सीखने की विनम्रता और ज्ञान साझा करना।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और गुरु-परंपरा का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

उपवास वैकल्पिक।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...

क्षेत्रीय अंतर

आश्रम, मठ, विद्यालय और परिवारों में रूप अलग।

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