आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
गुरु, शिक्षक और ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता का दिन।
शुरुआत और परंपरा
व्यास पूजा से इसका गहरा संबंध है, इसलिए व्यास पूर्णिमा नाम भी मिलता है।
कथा
महर्षि व्यास और ज्ञान-परंपरा के स्मरण के साथ जीवित गुरु/शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है।
भाव और महत्व
कृतज्ञता, सीखने की विनम्रता और ज्ञान साझा करना।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास वैकल्पिक।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...
क्षेत्रीय अंतर
आश्रम, मठ, विद्यालय और परिवारों में रूप अलग।