आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
दीप, लक्ष्मी पूजा, परिवार और क्षेत्रीय कथाओं का महापर्व।
शुरुआत और परंपरा
भारत के अलग क्षेत्रों में दीवाली राम-अयोध्या, लक्ष्मी, कृष्ण-नरकासुर, काली पूजा, व्यापारिक नववर्ष आदि केंद्रों से जुड़ती है।
कथा
एक ही सार्वभौमिक कथा नहीं। उत्तर भारत में राम की अयोध्या-वापसी की लोक स्मृति, पश्चिम में लक्ष्मी/व्यापारिक पूजा, बंगाल में काली पूजा और दक्षिण में नरकासुर प्रसंग प्रमुख हो सकते हैं।
भाव और महत्व
प्रकाश, आशा, परिवार, उदारता और नए आरंभ।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास आवश्यक नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
क्षेत्रीय अंतर
पटाखों में सुरक्षा, वायु/ध्वनि प्रदूषण और पशु/बुजुर्गों का ध्यान रखें।