आगामी तिथियाँ
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
दत्तात्रेय, जिन्हें ब्रह्मा-विष्णु-महेश के संयुक्त गुरु-रूप से जोड़ा जाता है, की जयंती।
शुरुआत और परंपरा
अत्रि और अनसूया की पुराणिक कथा से दत्तात्रेय जन्म जुड़ा है।
कथा
अनसूया की तपस्या और दत्तात्रेय के गुरु-स्वरूप की कथा ज्ञान और वैराग्य से जुड़ती है।
भाव और महत्व
गुरु-भाव, सरलता और सीखने की openness।
घर में सरल विधि
व्रत, भोजन और पारण
उपवास परंपरा अनुसार।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः।
क्षेत्रीय अंतर
महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और दत्त परंपराओं में विशेष।