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पर्व · महाराष्ट्र/West/South

दत्तात्रेय जयंती

दत्तात्रेय, जिन्हें ब्रह्मा-विष्णु-महेश के संयुक्त गुरु-रूप से जोड़ा जाता है, की जयंती।

आगामी तिथियाँ

बुधवार · 23 दिसंबर 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमा

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

दत्तात्रेय, जिन्हें ब्रह्मा-विष्णु-महेश के संयुक्त गुरु-रूप से जोड़ा जाता है, की जयंती।

शुरुआत और परंपरा

अत्रि और अनसूया की पुराणिक कथा से दत्तात्रेय जन्म जुड़ा है।

कथा

अनसूया की तपस्या और दत्तात्रेय के गुरु-स्वरूप की कथा ज्ञान और वैराग्य से जुड़ती है।

भाव और महत्व

गुरु-भाव, सरलता और सीखने की openness।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और श्री दत्तात्रेय का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

उपवास परंपरा अनुसार।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः।

क्षेत्रीय अंतर

महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और दत्त परंपराओं में विशेष।

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