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व्रत · बिहार / झारखण्ड / पूर्वी उत्तर प्रदेश

छठ पूजा

सूर्य उपासना का अत्यंत अनुशासित चार-दिवसीय पर्व।

आगामी तिथियाँ

रविवार · 15 नवंबर 2026कार्तिक शुक्ल षष्ठी · सूर्यास्त अर्घ्य; स्थानीय समय देखें

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

सूर्य उपासना का अत्यंत अनुशासित चार-दिवसीय पर्व।

शुरुआत और परंपरा

बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की जीवित लोक परंपरा में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की क्रमबद्ध विधि विकसित है।

कथा

सूर्य, प्रकृति और छठी मैया से जुड़ी कई लोक कथाएँ हैं; मुख्य सांस्कृतिक भाव कृतज्ञता, शुद्धता और परिवार/समुदाय की सहभागिता है।

भाव और महत्व

अनुशासन, प्रकृति के प्रति आभार और सामुदायिक सहयोग।

घर में सरल विधि

पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा खरना, तीसरा अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, चौथा उगते सूर्य को अर्घ्य। स्थानीय अनुभवी परिवार/समुदाय की विधि का सम्मान करें।

व्रत, भोजन और पारण

निर्जला व्रत अत्यंत कठोर है; इसे स्वास्थ्य-सुरक्षा और अनुभवी मार्गदर्शन के साथ ही रखें।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

ॐ सूर्याय नमः।

क्षेत्रीय अंतर

घाट, प्रसाद और गीतों की परंपरा स्थानीय समुदाय द्वारा संचालित होती है।

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