अनुष्ठान · सम्पूर्ण भारतअमावस्या
अमावस्या चंद्र मास का अंधकार-पक्ष का अंतिम दिन है। पितृ-स्मरण, स्नान, दान और मौन/साधना की विविध परंपराएँ इससे जुड़ी हैं।
आगामी तिथियाँ
गुरुवार · 10 सितंबर 2026अमावस्या
शनिवार · 10 अक्टूबर 2026अमावस्या
रविवार · 8 नवंबर 2026अमावस्या
मंगलवार · 8 दिसंबर 2026अमावस्या
शुक्रवार · 8 जनवरी 2027अमावस्या
शनिवार · 6 फरवरी 2027अमावस्या
सोमवार · 8 मार्च 2027अमावस्या
मंगलवार · 6 अप्रैल 2027अमावस्या
गुरुवार · 6 मई 2027अमावस्या
शुक्रवार · 4 जून 2027अमावस्या
रविवार · 4 जुलाई 2027अमावस्या
सोमवार · 2 अगस्त 2027अमावस्या
मंगलवार · 31 अगस्त 2027अमावस्या
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
अमावस्या चंद्र मास का अंधकार-पक्ष का अंतिम दिन है। पितृ-स्मरण, स्नान, दान और मौन/साधना की विविध परंपराएँ इससे जुड़ी हैं।
शुरुआत और परंपरा
अमावस्या अनेक मासिक और वार्षिक अनुष्ठानों का आधार है। सोमवती, मौनी, सर्वपितृ, दीपावली अमावस्या आदि अलग महत्व रखती हैं।
कथा
एक सार्वभौमिक कथा नहीं; मास और क्षेत्र के अनुसार कथा/अनुष्ठान बदलते हैं।
भाव और महत्व
पूर्वज-स्मरण, दान, आत्मचिंतन और विनम्रता।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और पितृ और इष्टदेव का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
उपवास सभी के लिए आवश्यक नहीं। परिवार की श्राद्ध/तर्पण परंपरा हो तो योग्य ज्ञाता/परिवार के बुजुर्ग से विधि पूछना बेहतर है।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ पितृभ्यः नमः या इष्ट मंत्र।
क्षेत्रीय अंतर
श्राद्ध-विधि परिवार, गोत्र और क्षेत्र के अनुसार काफी बदलती है।
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