आगामी तिथियाँ
रविवार · 9 मई 2027वैशाख शुक्ल तृतीया · पूजा 05:35-09:03 · नई दिल्ली
समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।
यह व्रत या पर्व क्या है?
दान, शुभारंभ और विष्णु/लक्ष्मी उपासना से जुड़ा दिन।
शुरुआत और परंपरा
अक्षय का अर्थ क्षय न होने वाला; पुराण/लोक परंपराओं में इसे पुण्य और दान से जोड़ा गया।
कथा
परशुराम जन्म, अन्नदान और विविध क्षेत्रीय कथाएँ इससे जुड़ती हैं।
भाव और महत्व
दान, संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग और शुभ संकल्प।
घर में सरल विधि
सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और विष्णु-लक्ष्मी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।
व्रत, भोजन और पारण
विशेष कठोर उपवास आवश्यक नहीं।
स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।
मंत्र / पाठ
ॐ नमो नारायणाय।
क्षेत्रीय अंतर
सोना खरीदना आधुनिक लोकप्रिय व्यवहार है, धार्मिक अनिवार्यता नहीं।