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व्रत · उत्तर भारत

अहोई अष्टमी

संतान और परिवार के मंगल से जुड़ा उत्तर भारतीय व्रत।

आगामी तिथियाँ

रविवार · 1 नवंबर 2026कार्तिक कृष्ण अष्टमी

समय मुख्यतः दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र संदर्भ पर आधारित है। अपने नगर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय जाँचें।

यह व्रत या पर्व क्या है?

संतान और परिवार के मंगल से जुड़ा उत्तर भारतीय व्रत।

शुरुआत और परंपरा

दीपावली से पहले आने वाली गृहस्थ स्त्री-व्रत परंपरा।

कथा

अहोई माता की लोकप्रिय कथा में अनजाने जीव-हानि, पश्चात्ताप और परिवार-मंगल की प्रार्थना का भाव आता है।

भाव और महत्व

जिम्मेदारी, करुणा और परिवार की मंगल-कामना।

घर में सरल विधि

सुबह स्नान और स्वच्छता के बाद शांत मन से संकल्प लें। पूजा-स्थान को सरल रखें और देवी का स्मरण करें। दीप, जल और उपलब्ध पुष्प/फल अर्पित किए जा सकते हैं। दिनभर व्रत अपनी स्वास्थ्य-स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें। संध्या में कथा या संबंधित स्तोत्र पढ़ें, आरती/प्रार्थना करें और अंत में परिवार तथा सबके मंगल की कामना करें। किसी विशेष सामग्री को अनिवार्य मानने की आवश्यकता नहीं; श्रद्धा, संयम और स्वच्छ आचरण मुख्य हैं।

व्रत, भोजन और पारण

परंपरा में संध्या तारों/कुछ स्थानों पर चंद्र-दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं।

स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, गर्भावस्था, आयु, दवाइयों या चिकित्सकीय आवश्यकता में कठोर उपवास न करें। भक्ति को शरीर को नुकसान पहुँचाने की परीक्षा न बनाएं।

मंत्र / पाठ

अहोई माता का स्मरण।

क्षेत्रीय अंतर

मुख्यतः उत्तर भारत।

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